शिक्षा अधिकारी जहांगीरगंज की मनमानी से लोगों में आक्रोश
ुजहांगीरगंज शिक्षा क्षेत्र खंड शिक्षा अधिकारी संतोष पांडेय की मनमानी से अटका विद्यालय का नाम परिवर्तन, ग्रामीणों में आक्रोश
खंड शिक्षा अधिकारी संतोष पांडेय की लापरवाही मनमानी से वर्षों से किसके सहयोग और किसके संरक्षण में नहीं बदला विद्यालय का नाम , विद्यालयों की कमियां शिकायतों को दबाने और छुपाने में माहिर ।
गांव बभनपूरा में विद्यालय, नाम कमालपुर पिकार प्रशासनिक मनमानी से परेशान ग्रामीण।
जहांगीरगंज बी आर सी कार्यालय में तैनात है तीन साल से एक ही जगह पर खंड शिक्षा अधिकारी संतोष पांडेय किसके सहयोग और किसके संरक्षण में क्यों नहीं हुआ ट्रांसफर।
शिकायतकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार करते हैं खंड शिक्षा अधिकारी जनसुनवाई शिकायत के बावजूद कार्रवाई शून्य, जांच आख्या पर उठे गंभीर सवाल।
ग्रामीणों का आरोप संतोष पांडेय की उदासीनता से नहीं हुआ नाम व स्थान संशोधन, निष्पक्ष जांच की मांग।
संवाददाता आलापुर अम्बेडकरनगर।
अम्बेडकर नगर जिले के विकास खंड जहांगीरगंज अंतर्गत गांव बभनपूरा में स्थित एक प्राथमिक विद्यालय के नाम को लेकर विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी संतोष पांडे की लापरवाही और मनमानी के चलते वर्षों बाद भी विद्यालय का नाम परिवर्तित नहीं किया गया।ग्राम बभनपूरा में संचालित विद्यालय आज भी प्राथमिक विद्यालय कमालपुर पिकार के नाम से अभिलेखों और नामपट्ट पर दर्ज है, जबकि ग्राम पंचायत कमालपुर पिकार और बभनपूरा अलग-अलग राजस्व ग्राम हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह एक स्पष्ट प्रशासनिक त्रुटि है, जिसे सुधारने के बजाय नजरअंदाज किया जा रहा है।जनसुनवाई शिकायत के बावजूद कार्रवाई शून्य ग्रामीण वीर बहादुर सिंह के नेतृत्व में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव एवं अन्य ग्रामीणों ने 30 मई 2025 को जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत संख्या 40017825015422 दर्ज कर विद्यालय का नाम प्राथमिक विद्यालय बभनपूरा किए जाने की मांग की थी।ग्रामीणों के अनुसार, शिकायत की जांच खंड शिक्षा अधिकारी संतोष पांडे को सौंपी गई, लेकिन जांच रिपोर्ट औपचारिकता तक सीमित रही। आरोप है कि शिकायतकर्ताओं को गुमराह करते हुए भ्रामक आख्या प्रेषित कर दी गई, जबकि जमीनी स्तर पर कोई परिवर्तन नहीं हुआ।शिकायतकर्ताओं को प्रताड़ना का आरोप ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि किसी विद्यालय में अध्यापकों या व्यवस्थाओं की कमियों को लेकर आवेदन या आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत की जाती है, तो संबंधित अधिकारी निष्पक्ष कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ताओं को ही परेशान करने लगते हैं।आरोप है कि जिन विद्यालयों में अनियमितताएं होती हैं, वहां संबंधित व्यक्तियों से कथित तालमेल बनाकर कमियों को दबाने का प्रयास किया जाता है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पारदर्शिता के बजाय मामलों को दबाने की प्रवृत्ति से शिक्षा व्यवस्था की साख पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
जिलाधिकारी साहब से हस्तक्षेप की मांग, उच्च स्तरीय जांच की मांग ग्रामीणों का कहना है कि जिलाधिकारी साहब को भी प्रार्थना पत्र दिया गया है, लेकिन अब तक नाम परिवर्तन की दिशा में कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ।परेशान ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, विद्यालय का नाम राजस्व अभिलेखों के अनुरूप तत्काल संशोधित किया जाए तथा यदि जांच में लापरवाही या तथ्यों को छिपाने की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र न्यायोचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च प्रशासनिक स्तर पर पुनः शिकायत दर्ज कराने के साथ वैधानिक कदम उठाने को बाध्य होंगे।
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